भारत में रियल एस्टेट का नया ट्रेंड: फ्लैट छोड़ प्लॉट क्यों खरीद रहे हैं लोग?

2025 में भारतीय रियल एस्टेट बाजार अहम मोड़ पर खड़ा है। कोविड-19 महामारी के बाद लोगों की प्राथमिकताएं बड़ी तेजी से बदल रही हैं। जहां कुछ साल पहले तक लोग शहरी इलाकों में फ्लैट लेना बेहतर मानते थे, वहीं अब देश के बड़े हिस्से में रेजिडेंशियल प्लॉट लेने का क्रेज तेजी से बढ़ा है। टियर-I और टियर-II दोनों ही श्रेणी के शहरों में प्लॉट खरीदने वालों की संख्या में औसत से कहीं ज्यादा इजाफा देखा जा रहा है। 2022 से 2025 के बीच ही देश के शीर्ष शहरों में 4.7 लाख से अधिक प्लॉट लॉन्च हुए, जिनकी कुल वैल्यू 2.44 लाख करोड़ रुपये आंकी गई है।

बहुत से खरीदार मानते हैं कि प्लॉट खरीदकर घर बनाने से उन्हें डिजाइन, लेआउट और निर्माण में पूरी आज़ादी मिलती है। फ्लैट्स में तयशुदा ढांचा और सीमित विस्तार होता है, लेकिन प्लॉट पर खरीदार पूरी तरह से अपनी पसंद का स्पेस, गार्डन, वेंटिलेशन, पार्किंग और सुविधाएं डिजाइन कर सकते हैं।

प्लॉट्स की वार्षिक कीमत वृद्धि दर 10–12% तक दर्ज की गई है, जबकि फ्लैट्स में यह ग्रोथ 2–6% के इर्द-गिर्द ही रहती है4। खास तौर पर दक्षिण भारत के शहरों—हैदराबाद, चेन्नई, बेंगलुरु—में 2018 के बाद प्लॉट्स की कीमतें 13–21% सालाना बढ़ी हैं। फ्लैट्स के मुकाबले प्लॉट्स में पूंजी सराहना, यानी मूल्यवृद्धि की संभावना कहीं ज्यादा है।

महामारी के बाद लोग अब अलग से बड़ा ओपन स्पेस, गार्डन और खुद की पसंद का माहौल चाहते हैं। फ्लैट्स में सीमित प्राइवेसी, भीड़, और साझा सुविधाओं के चलते कई परिवार अब व्यक्तिगत प्लॉट को पहली पसंद बना रहे हैं।

प्लॉट्स में निवेश करने पर निवेशक कई तरह के फायदे उठा सकते हैं:

  • जल्दी बेचने-खरीदने की सुविधा (लिक्विडिटी ज्यादा)
  • लोअर एंट्री कॉस्ट (शुरुआती कीमतें अपेक्षाकृत कम होती हैं)
  • लंबे समय में बेहतर निवेश रिटर्न

डेवलपर्स के लिए भी प्लॉट्स आकर्षक हैं, क्योंकि इनका कैशफ्लो तेजी से आता है और प्रोजेक्ट की राजधानी आवश्यकता (कार्यक्षमता के लिए जरूरी पूंजी) कम होती है।

प्लॉट्स की मांग का सबसे तेज़ बूम टियर-II और टियर-III शहरों में देखने को मिल रहा है। 2022-2025 के दौरान करीब 52% नए प्लॉट्स इन्हीं शहरों से लॉन्च हुए हैं। बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट सिटी मिशन, और सरकारी योजनाओं के चलते इन इलाकों में प्लॉट्स पर निवेश जमकर बढ़ रहा है।

  • लोकेशन: पूरी संभावना देखें कि भविष्य में आसपास कौन-कौन सी सुविधाएं और विकास होंगे।
  • लीगल स्टेटस: लैंड टाइटल, एनओसी, लीगल क्लीयरेंस एकदम सही रखें।
  • इंफ्रास्ट्रक्चर: पानी, बिजली, रोड, सार्वजनिक परिवहन पास या आने वाले हैं या नहीं।
  • भविष्य की कीमत: आस-पास के भाव और विकास की संभावना को समझें।
  • रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट: इलाके में पिछली 2-5 वर्षों की प्राइस ट्रेंड को जरूर चेक करें।
  • सुरक्षा: ज्यादातर फ्लैट्स में गेटेड कम्युनिटी व सिक्योरिटी सिस्टम रहता है।
  • तुरंत रहने की सुविधा: रेडी-मेड फ्लैट्स तुरंत शिफ्टिंग के लिए बेहतर हैं—कोई कंस्ट्रक्शन झंझट नहीं।
  • साझा सुविधाएं: पार्किंग, क्लब, जिम, स्विमिंग पूल, बच्चों के खेलने की जगह, कम्युनिटी हॉल आदि।
  • फाइनेंसिंग और लोन: फ्लैट का लोन आसानी से, लंबी अवधि (30 साल तक) के लिए मिल जाता है। प्लॉट लोन लेना कठिन है और 15 साल की अवधि तक सीमित रहता है।

डेवलपर्स अब तेजी से प्लॉटेड डेवलपमेंट्स की ओर मूव कर रहे हैं। रेसिडेंशियल प्लॉट के प्रोजेक्ट्स में उन्हें—

  • जल्दी सेल्स,
  • कम पूंजी व रिस्क,
  • और ज्यादा निवेशकों की रुचि मिल रही है।

महामारी के बाद प्लॉटेड टाउनशिप, इंटीग्रेटेड टाउनशिप और गार्डन सिटीज़ जैसी स्कीम्स लोकप्रिय हो गई हैं। ऐसे प्रोजेक्ट्स में डेवलपर्स सिर्फ प्लॉट्स बेचकर भी मुनाफा कमा रहे हैं, जबकि फ्लैट्स में बिक्री एवं प्रोजेक्ट पूरा होने में लंबा वक्त लग जाता है।

  • पिछले तीन वर्षों में टॉप 10 शहरों में 4.7 लाख प्लॉट्स लॉन्च हुए, जिसमें अकेले टियर-II शहरों की हिस्सेदारी 52% रही।
  • इन प्लॉट्स का कुल बाजार आकार 2.44 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचा।
  • जिन शहरों में सबसे ज्यादा प्लॉट लॉन्च हुए हैं: हैदराबाद, इंदौर, चेन्नई, नागपुर, बेंगलुरु।
  • साल 2025 के शुरुआती पांच महीनों में 45,591 रेसिडेंशियल प्लॉट्स लॉन्च हो चुके हैं।
  • 2024 में औसत लॉन्च प्राइस 27% की दर से बढ़ा है—जो 3,679 रुपये प्रति वर्ग फुट तक हो गया है।
  • स्वतंत्र रूप से प्लॉट्स की सालाना रिटर्न ग्रोथ 7% (CAGR) दर्ज हुई, जबकि फ्लैट्स में यह आंकड़ा सिर्फ 2% रहा।
  • खरीदार अब ‘लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट’ और ‘पर्सनल स्पेस’ को महत्व दे रहे हैं।
  • पार्ट टाइम इन्वेस्टर्स, NRIs और टियर-II सिटी के लोग बड़े पैमाने पर प्लॉट्स में निवेश कर रहे हैं।
  • सीनियर सिटिज़न और रिटायर तक पहुंचने वाले भी शांत, कम भीड़-भाड़ वाले प्लॉट्स को तरजीह दे रहे हैं।
  • हैदराबाद: सबसे बड़ा प्लॉट्स लॉन्च हब, यहां 2024-25 में प्लॉट प्राइस में बूम देखा गया।
  • इंदौर: टियर-II शहरों में सबसे तेज ग्रोथ, यहां 26,500 से ज्यादा प्लॉट्स पिछले साल लॉन्च हुए।
  • चेन्नई: प्रॉपर्टी मार्केट का बड़ा केंद्र, वैल्यू और डिमांड दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं।
  • बेंगलुरु और नागपुर: आईटी पार्क और इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स के चलते इन शहरी क्षेत्रों में प्लॉट्स की डिमांड बढ़ी है।
  • प्लॉट्स में निवेश करते समय लिक्विडिटी तुलनात्मक रूप से ज्यादा रहती है। सही लोकेशन पर प्लॉट्स जल्दी बिक जाते हैं।
  • फ्लैट्स में टैक्स छूट और HRA जैसे लाभ मिलते हैं, जबकि प्लॉट्स में टैक्स कटौती सीमित रहती है।
  • प्लॉट्स पर लोन की टेन्योर और एलिजिबिलिटी, फ्लैट्स से कम होती है, जिसकी वजह से निवेशकों को ज्यादा पैसा खुद लगाना पड़ सकता है।
  • फ्लेक्सिबिलिटीअधिक मूल्य वृद्धिव्यक्तिगत स्पेसभविष्य की संभावनाएं—यह सारे पहलू आज के खरीदार के लिए महत्वपूर्ण हो गए हैं।
  • शहरीकरण, सरकारी नीतियां (स्मार्ट सिटी, पीएम आवास योजना), और टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर के बल पर प्लॉट्स का ग्रोथ तेज़ है |
  • पर्सनल वर्क-फ्रॉम-होम कल्चर, एन्वायरनमेंट फ्रेंडली डिवेलपमेंट्स और ग्रीन स्पेस की बढ़ती चाहत ने भी ट्रेंड को बल दिया है।

इस प्रकार, भारत में रियल एस्टेट की तस्वीर में बड़ा बदलाव सामने आ रहा है। नई सोच और जीवनशैली के साथ, फ्लैट्स से हटकर प्लॉट्स की ओर रुझान लगातार बढ़ रहा है |

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